International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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प्राथमिक शिक्षा एवं ग्रामीण स्कूल का वर्तमान परिदृश्य

Author(s) विभाकर उपमन्यु
Country India
Abstract प्रस्तुत शोध लेख विभिन्न साहित्य की समीक्षा के आधार पर प्रस्तुत किया गया है इस शोधपत्र में प्राथमिक शिक्षा की वर्तमान स्थिति का वर्णन किया गया है। प्रजातंत्रात्मक शासन व्यवस्था में शिक्षा राष्ट्र की आधारशिला का कार्य करती है। विगत दशकों से भारत में प्राथमिक शिक्षा के पुनर्गठन और पुनरुद्धार के लिए सक्रियता बढ़ी है। किंतु दुर्भाग्यवश शिक्षा के मात्रात्मक प्रसार एवं प्रचार में उल्लेखनीय प्रगति के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर निम्न होता जा रहा है। देश के ज्यादातर शिक्षाविदों व बुद्धिजीवियों ने प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में तत्काल सुधार की आवश्यकता बल दिया, जो नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दे सकें और भविष्य में बढ़ती कौशल आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। शिक्षा की गुणवत्ता को कायम रखने के लिए इन सभी उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करना होगा।

प्राथमिक शिक्षा ही किसी व्यक्ति के जीवन की वह नींव होती है जिस पर उसके संपूर्ण जीवन का भविष्य व्यतीत होता है। प्राथमिक शिक्षा ज्ञान का नियम है, इसमें ज्ञान और सूचना के प्रारंभिक तत्व शामिल हैं। जिन्हें बच्चों को परोसा और सिखाया जाता है। एक बच्चा बचपन के दौरान एक कोरे कागज की तरह होता है और इस दौरान इंसान का दिमाग अपने सुपर एक्टिव रूप में होता है। यह वैज्ञानिक रूप से साबित हो चुका है पहले 5 वर्षों में बच्चों के सभी साइको मीटर, कौशल, संज्ञानात्मक व भावनात्मक, सामाजिक और सीखने के कौशल अपने सबसे अच्छे रूप में विकसित होते हैं। देश की एक बड़ी आबादी सरकारी स्कूलों के ही सहारे हैं। सरकारी नियंत्रण वाले प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में न तो शिक्षा का स्तर सुधार पा रहा है और न ही इनमें विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाएं मिल पा रही है। निम्न मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से सामान्य स्थिति वाले लोगों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल ही शिक्षा प्राप्त करने का एकमात्र जरिया है फिर वह चाहे कैसे भी हों ? इन स्कूलों में न तो योग्य अध्यापक हैं और न ही मूलभूत सुविधाएं। इन स्कूलों में पढ़ाई लिखाई की असलियत स्वयंसेवी संगठन प्रथम की हर साल आने वाली रिपोर्ट बताती है, रिपोर्ट के मुताबिक कक्षा चार या पांच के बच्चे अपने से निकले कक्षा की किताबें तक नहीं पढ़ पाते।
Keywords प्राथमिक शिक्षा, शिक्षा व्यवस्था, शिक्षण गुणवत्ता, नवाचार, निजीकरण एवं उत्तरदायित्व
Field Sociology > Education
Published In Volume 4, Issue 4, July-August 2022
Published On 2022-07-29
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2022.v04i04.013
Short DOI https://doi.org/gqk3h4

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